नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 अगस्त को जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ सैकड़ों लोग जुटे। यह प्रदर्शन ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ के आह्वान पर हुआ, जो एक इंस्टाग्राम आधारित पेज है और जिसके करीब 56 लाख (5.6 मिलियन) फॉलोअर्स** हैं। प्रदर्शन में बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान समेत कई राज्यों से लोग पहुंचे। यह आरक्षण जैसे संवेदनशील और पुराने बहस वाले मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ले आया है।
प्रदर्शनकारियों की मांगें
- आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाया जाए
- नारा दिया गया — “अमीरों को कोटा नहीं चाहिए” (rich don’t need quota)
- क्रीमी लेयर मानदंड लागू करने और SC, ST, OBC से जुड़ी नीतियों की समीक्षा की मांग
- अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि “जाति चाहे कोई भी हो, गरीब व्यक्ति को मदद मिलनी चाहिए”
- अधिकांश प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण हटाने की बात कही, जबकि कुछ ने इसे आर्थिक आधार पर करने की मांग रखी
दूसरा पक्ष: आरक्षण के समर्थन में तर्क
आरक्षण के समर्थक इसे संविधान प्रदत्त सामाजिक न्याय का साधन मानते हैं:
- आरक्षण ऐतिहासिक रूप से वंचित और भेदभाव झेलते आए वर्गों (SC/ST/OBC) को समान अवसर देने के लिए दिया गया है
- समर्थकों का तर्क है कि जब तक जातिगत भेदभाव मौजूद है, तब तक जाति आधारित आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी
- उनका मानना है कि सिर्फ आर्थिक आधार अपनाने से सामाजिक भेदभाव की समस्या का समाधान नहीं होगा
यह बहस दशकों पुरानी है और इसमें समाज व राजनीति दोनों में अलग-अलग राय है।
पुलिस और अनुमति का मामला
- दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी
- पुलिस के मुताबिक अनुमति रामलीला मैदान में शाम 4 बजे तक के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए दी गई थी
- सुबह जंतर-मंतर पर जुटे कुछ लोगों को पुलिस ने हटा दिया
- एहतियात के तौर पर दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को तैनात किया गया
फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण रही। आरक्षण से जुड़ा यह मुद्दा संवेदनशील है और इस पर विभिन्न पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं। किसी भी नीति में बदलाव संसद और सरकार के दायरे में आता है।
(यह रिपोर्ट मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित तथ्यात्मक प्रस्तुति है; इसका उद्देश्य किसी पक्ष का समर्थन या विरोध नहीं है।)
Sources: ThePrint | Business Standard

