बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO सितंबर के पहले हफ्ते में GISAT-1A (EOS-05) सैटेलाइट लॉन्च कर लगभग 7 महीने के लॉन्च गैप** को खत्म करेगा। यह मिशन जनवरी में हुई असफलता के बाद ISRO की लॉन्च पैड पर पहली वापसी होगी।
जनवरी में क्यों फेल हुआ था मिशन
12 जनवरी 2026 को PSLV-C62/EOS-N1 मिशन कई पेलोड्स के साथ लॉन्च हुआ था, लेकिन सैटेलाइट अपनी तय कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था। रॉकेट के पहले और दूसरे चरण ने सामान्य ढंग से काम किया, लेकिन तीसरे चरण के अलग होने से ठीक पहले रोल-रेट में गड़बड़ी आ गई, जिससे मिशन विफल हो गया। गौरतलब है कि 2025 में भी PSLV-C61/EOS-09 मिशन रॉकेट के तीसरे चरण में आई खराबी के चलते फेल हुआ था — यानी लगातार दो असफलताओं ने ISRO को सतर्कता के साथ जांच-पड़ताल के लिए रुकने पर मजबूर किया।
GISAT-1A सैटेलाइट क्या करेगा
GISAT-1A भू-स्थिर कक्षा (जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) से काम करने वाला अर्थ-ऑब्जर्विंग सैटेलाइट है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की निरंतर निगरानी करेगा। इसका मुख्य मकसद प्राकृतिक आपदाओं की तेज पहचान और निगरानी** करना है — यानी बाढ़, चक्रवात या भूस्खलन जैसी घटनाओं पर ISRO को लगभग रियल-टाइम जानकारी मिल सकेगी।
सैटेलाइट को GSLV (जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च वेहिकल) रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा।
ISRO के लिए क्यों अहम है यह मिशन
लगातार दो असफलताओं के बाद यह लॉन्च ISRO की विश्वसनीयता और तकनीकी क्षमता साबित करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। अगर मिशन सफल रहता है, तो यह न सिर्फ आपदा प्रबंधन के लिए एक अहम उपकरण साबित होगा, बल्कि आगामी बड़े मिशनों — जिनमें मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान भी शामिल है — के लिए भी भरोसा बहाल करेगा।
Sources: Business Standard | Swarajya

