बेंगलुरु. भारत अंतरिक्ष और तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग की तैयारी में है। नेशनल स्पेस टेक्नोलॉजी कॉन्क्लेव 2026 में ISRO के विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI/ML), क्वांटम तकनीक और इंटर-सैटेलाइट लिंक** भारत के भविष्य के सैटेलाइट सिस्टम और अंतरिक्ष मिशनों की रीढ़ बनेंगे। यानी आने वाले वर्षों में भारत के उपग्रह और भी स्मार्ट, सुरक्षित और सक्षम होंगे।
AI और क्वांटम से क्या बदलेगा
ISRO विशेषज्ञों के मुताबिक ये तकनीकें अंतरिक्ष मिशनों को नई ताकत देंगी:
- AI/ML: सैटेलाइट पर ही ऑन-बोर्ड प्रोसेसिंग और एज कंप्यूटिंग संभव होगी — यानी डेटा को अंतरिक्ष में ही तेजी से प्रोसेस किया जा सकेगा
- क्वांटम तकनीक: वित्तीय, सैन्य और अन्य संवेदनशील संचार को और सुरक्षित बनाएगी
- इंटर-सैटेलाइट लिंक: उपग्रहों के बीच बेहतर तालमेल और संपर्क
भारत का AI मिशन तेज
अंतरिक्ष के साथ-साथ भारत AI के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है:
- हाल ही में भारत ने ₹500 करोड़ का AI फंड शुरू किया है
- भारतीय AI रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (IAIRO) की स्थापना की गई है, जो भारत की जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप मौलिक और व्यावहारिक AI शोध पर केंद्रित होगी
यह भारत के ‘AI विजन’ से ‘संप्रभु क्रियान्वयन’ (sovereign execution) की ओर बढ़ने का संकेत है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
चंद्रयान मिशनों और गगनयान की तैयारियों के बाद ISRO का AI और क्वांटम पर जोर भारत की बढ़ती वैज्ञानिक ताकत को दर्शाता है। स्वदेशी तकनीक के दम पर भारत न सिर्फ अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष होड़ में भी अग्रणी भूमिका की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक AI और क्वांटम भारत के अगले दशक के अंतरिक्ष अभियानों को नई दिशा देंगे।
Sources: The Quantum Insider | The Tribune

