नई दिल्ली. एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर उठा विवाद अब सड़क से सियासत तक पहुंच गया है। एक तरफ दिल्ली के ट्रांसपोर्ट संगठनों ने 4 अगस्त को संसद तक विरोध मार्च निकाला, तो दूसरी तरफ विपक्षी दल AAP और कांग्रेस** भी इस मुद्दे पर सक्रिय हो गए। कई जगह प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोका और कुछ को हिरासत में लिया।
किसने क्या किया
- ट्रांसपोर्ट संगठन: दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन समेत कई संगठनों ने संसद तक मार्च कर E20 नीति की समीक्षा और 100% पेट्रोल के विकल्प की मांग की
- केजरीवाल (AAP): करीब 100 समर्थकों के साथ PM आवास की ओर कूच किया, पर पुलिस ने फिरोजशाह रोड पर रोक दिया; केजरीवाल ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया
- कांग्रेस: नागपुर में गडकरी आवास की ओर मार्च के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए
क्या है मांग
- पेट्रोल पंपों पर 100% शुद्ध पेट्रोल का विकल्प भी मिले
- E20 का असर वाहनों के इंजन, माइलेज और मेंटेनेंस पर पड़ने की शिकायत
- नीति की स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा — जिसमें वाहन मालिक, उपभोक्ता, ट्रांसपोर्टर, ऑटो कंपनियां और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हों
- उपभोक्ता को फ्यूल चुनने का हक मिले
दूसरी तरफ: सरकार का पक्ष
एथेनॉल-ब्लेंडिंग सरकार की बड़ी नीति है, जिसके पक्ष में मजबूत तर्क हैं:
- तेल आयात पर निर्भरता घटाना और विदेशी मुद्रा की बचत
- प्रदूषण में कमी और पर्यावरण को फायदा
- गन्ना/मक्का किसानों की आय में इजाफा
- सरकार का कहना रहा है कि E20 को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है
गौरतलब है कि हाल में सुप्रीम कोर्ट भी E20 (20% एथेनॉल मिश्रण) की अनुमति के खिलाफ दायर एक PIL खारिज कर चुका है।
आगे क्या
E20 का मुद्दा अब उपभोक्ता चिंता से आगे बढ़कर विपक्ष के लिए सियासी हथियार बनता दिख रहा है। एक ओर सरकार की ऊर्जा-आत्मनिर्भरता और पर्यावरण नीति है, तो दूसरी ओर वाहन मालिकों-ट्रांसपोर्टरों की व्यावहारिक दिक्कतें और उपभोक्ता विकल्प का सवाल। सरकार की ओर से मांगों पर औपचारिक जवाब का इंतजार है। यह देखना अहम होगा कि सरकार फ्यूल-लेबलिंग या विकल्प को लेकर कोई कदम उठाती है या नहीं।
(यह रिपोर्ट विरोध प्रदर्शनों और उससे जुड़े मुद्दों को तथ्यात्मक व निष्पक्ष रूप से पेश करती है; मांगें प्रदर्शनकारियों/विपक्ष की हैं, नीति संबंधी तर्क सरकार के।)
Sources: The Federal | Business Standard | Business Today

