नई दिल्ली. संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त तक चलने की संभावना है, और इस बार सरकार का एजेंडा बेहद अहम रहने वाला है। केंद्र सरकार इस सत्र में Delimitation Bill (परिसीमन विधेयक), महिला आरक्षण और 131वां संविधान संशोधन विधेयक** दोबारा पेश करने की तैयारी में है। ये वही विधेयक हैं जो अप्रैल 2026 के बजट सत्र में लोकसभा में रखे गए थे, पर जरूरी दो-तिहाई बहुमत न जुटने के कारण पास नहीं हो सके थे।
सत्र का एजेंडा
- Delimitation Bill 2026 — लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़ा विधेयक, जिस पर उत्तर बनाम दक्षिण राज्यों की सियासत गरमाई हुई है।
- Constitution (131st Amendment) Bill 2026 — परिसीमन और आरक्षण से जुड़ा संवैधानिक संशोधन।
- महिला आरक्षण (Women’s Reservation) — महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने वाले प्रावधान को आगे बढ़ाने की कोशिश।
विपक्ष का समर्थन जुटाने की रणनीति
संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है, इसलिए सरकार issue-based समर्थन के लिए विपक्षी दलों, खासकर DMK और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों से संपर्क साध रही है। दक्षिण भारत के दल परिसीमन को लेकर आशंकित हैं — उन्हें डर है कि जनसंख्या आधारित सीट-बंटवारे से दक्षिणी राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व घट सकता है। ऐसे में सरकार के लिए इन विधेयकों को पास कराना आसान नहीं होगा।
क्यों अहम है यह सत्र
परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों ही देश की भविष्य की राजनीति को आकार देने वाले मुद्दे हैं। अगर ये विधेयक पास होते हैं तो लोकसभा सीटों की संख्या और राज्यों के बीच उनके बंटवारे पर बड़ा असर पड़ेगा। यही वजह है कि इस मानसून सत्र पर सत्ता पक्ष और विपक्ष — दोनों की निगाहें टिकी हैं।
Sources: The Statesman | News Arena India
