नई दिल्ली/गुरुग्राम. CJP आंदोलन में अब बातचीत और संभावित समाधान की आहट सुनाई देने लगी है। मेदांता अस्पताल (गुरुग्राम) के ICU में इलाज करा रहे सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ने के लिए सरकार के सामने एक नई शर्त रखी है — उन्होंने कहा है कि अगर केंद्र यह भरोसा दे कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई कानूनी केस, उत्पीड़न या दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी**, तो वे अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे।
वांगचुक का पत्र: क्या लिखा
रिपोर्ट्स के मुताबिक वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखे पत्र में कहा:
- सरकार यह स्पष्ट और बिना शर्त भरोसा दे कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा प्रदर्शनकारी पर दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं होगी
- उन्होंने 20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च को शांतिपूर्ण बताया और पुलिस के ‘बल प्रयोग’ पर सवाल उठाए
- यानी अब आंदोलन का फोकस शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा पर भी आ गया है
यह रुख आंदोलन में एक संभावित ‘ऑफ-रैंप’ (समाधान का रास्ता) के तौर पर देखा जा रहा है।
मेदांता ICU में हालत स्थिर
- अस्पताल के 22 जुलाई के अपडेट के मुताबिक वांगचुक की हालत अब स्थिर, पर वे अगले आदेश तक ICU में रहेंगे
- दिल्ली HC ने ही उन्हें सफदरजंग से मेदांता शिफ्ट करने की मंजूरी दी थी (लगातार निगरानी की जरूरत)
- वे 28 जून से अनशन पर हैं
नड्डा RML पहुंचे, धरना जारी
- केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा सोमवार के लाठीचार्ज में घायल युवती का हाल जानने RML अस्पताल पहुंचे — जो सरकार की ओर से एक अहम संवेदनशील कदम माना जा रहा है (घायल युवती वेंटिलेटर पर बताई गई)
- जंतर-मंतर पर CJP का धरना जारी है; संस्थापक अभिजीत डिपके का अनशन भी चल रहा है
- CJP की मांगें — प्रधान की बर्खास्तगी, वांगचुक की ‘रिहाई’, मृत NEET अभ्यर्थियों के परिवार को मुआवजा
अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार वांगचुक की शर्त पर क्या रुख अपनाती है — इससे तय होगा कि यह महीनेभर पुराना आंदोलन समाधान की ओर बढ़ता है या और लंबा खिंचता है।
(मांगें और आरोप प्रदर्शनकारियों/CJP के हैं; सेहत संबंधी जानकारी अस्पताल के हवाले से। घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है।)
Sources: The Week | The Researchers | Business Standard

