नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस** देने की तैयारी में हैं, जिसके अगले दो हफ्तों में पेश होने की संभावना है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों को साथ लाने की कोशिश शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि यह तीसरी बार है जब विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस की तैयारी कर रहा है — इससे पहले 24 अप्रैल को 73 विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में नोटिस दिया था।
राहुल गांधी के आरोप क्या हैं
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर सात प्रमुख आरोप लगाए, जिनमें कथित ‘वोट चोरी’, देशद्रोह जैसा आचरण और सरकारी गवाह बनने की सलाह जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। उन्होंने ‘वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी’ का नारा देते हुए दावा किया कि वे बीते तीन साल से मतदाता सूची (SIR) प्रक्रिया में गड़बड़ियों को उजागर करते आ रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर आपत्ति जताई थी। कांग्रेस नेता ने CEC से इस्तीफे की मांग की है।
गौरतलब है कि ये आरोप विपक्ष के दावे हैं, चुनाव आयोग या CEC की ओर से इन पर अब तक विस्तृत सार्वजनिक जवाब नहीं आया है।
विपक्ष में और कौन शामिल
रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस के अलावा कई अन्य विपक्षी दल भी SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर पहले से सवाल उठाते रहे हैं। इस बीच युवा आंदोलन समूहों ने भी अलग से चुनाव आयोग के रवैये पर नाराजगी जताई है, हालांकि यह अलग मुद्दा है और महाभियोग प्रस्ताव मुख्यतः कांग्रेस व संसद के भीतर के विपक्षी गठबंधन की पहल है।
आगे क्या
संविधान के प्रावधानों के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव पारित कराना जरूरी होता है, जो व्यवहार में एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है। पिछली बार अप्रैल में दिया गया नोटिस भी आगे नहीं बढ़ पाया था। अगले दो हफ्तों में विपक्ष द्वारा औपचारिक नोटिस दिए जाने के बाद इस मुद्दे पर संसद के आगामी सत्र में हंगामे की आशंका है।
Sources: Prabhat Khabar | AajTak

