नई दिल्ली/वॉशिंगटन. अमेरिका के नए व्यापार उपायों में भारत को अपेक्षाकृत बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने Section 301 (US Trade Act, 1974) के तहत अंतिम उपायों की घोषणा करते हुए भारत को निचले 10% टैरिफ स्लैब में रखा है — जबकि प्रमुख प्रतिस्पर्धी चीन और वियतनाम को ऊंचे 12.5% स्लैब** में डाला गया है। भारत के लिए यह एक कूटनीतिक और व्यापारिक बढ़त मानी जा रही है।
भारत के लिए क्या राहत
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक इस फैसले के भारत के लिए तीन बड़े मायने हैं:
- अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ प्रस्तावित 12.5% से घटाकर 10% कर दिया
- भारत के करीब 45% निर्यात इस 10% अतिरिक्त टैरिफ के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे
- भारत को 16 अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ निचले स्लैब में रखा गया — यानी बेहतर प्रतिस्पर्धी स्थिति
यह टैरिफ अमेरिका की कथित ‘जबरन श्रम’ (forced labour) से जुड़ी Section 301 कार्रवाई के तहत लगाया गया है।
चीन-वियतनाम से आगे भारत
व्यापारिक नजरिए से भारत की स्थिति प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर है:
- चीन और वियतनाम जैसे बड़े निर्यातक 12.5% के ऊंचे टैरिफ में — यानी उनके सामान अमेरिकी बाजार में महंगे पड़ेंगे
- भारत का 10% स्लैब और 45% निर्यात की छूट से भारतीय उत्पादों को मूल्य के मामले में बढ़त
- टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और अन्य निर्यात क्षेत्रों को इसका संभावित फायदा
बड़ी तस्वीर: व्यापार मोर्चे पर संतुलन
हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन के टैरिफ कदमों से भारत के अमेरिका को निर्यात पर दबाव रहा है — रिपोर्ट्स के मुताबिक लगातार तीन महीने निर्यात घटा भी। ऐसे में निचले स्लैब में जगह मिलना भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की खबर है। जानकारों के मुताबिक यह भारत की सधी हुई व्यापार कूटनीति का नतीजा है। हालांकि आगे भी वैश्विक व्यापार माहौल, US-Iran तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी रहेंगी। फिलहाल Section 301 में मिली यह राहत भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है।
Sources: Business Standard | The Tribune | Organiser

