नई दिल्ली/वॉशिंगटन. मध्य-पूर्व एक बार फिर सुलग उठा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान पर नए सिरे से हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर डील को ‘खत्म’ घोषित** कर दिया है। इस ताजा तनाव ने कूटनीतिक कोशिशों पर भी पानी फेर दिया है।
सीजफायर कैसे टूटा
- 14 जून को मध्यस्थों ने एक MoU का ऐलान किया था, जिसका मकसद 60 दिनों में जंग औपचारिक रूप से खत्म करना था
- जुलाई में हालात फिर बिगड़े जब ईरान ने कथित तौर पर पूर्व-निर्धारित रूट से हटकर तीन व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया
- अब ताजा हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद सीजफायर पूरी तरह ध्वस्त
- ईरानी गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी सीजफायर बहाली की कोशिशों के तहत पाकिस्तान पहुंचे
भारत के लिए दोहरी चिंता
भारत ने 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई इस जंग में लगातार तटस्थ रुख बनाए रखा है और बातचीत की अपील करता रहा है। लेकिन इस संघर्ष का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है:
- ऊर्जा संकट: ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने से कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर दबाव — Brent क्रूड ~$90/बैरल, जिससे भारतीय बाजार और महंगाई प्रभावित
- पाकिस्तान की भूमिका: सीजफायर की मध्यस्थता में पाकिस्तान की दिखती भूमिका से भारत में कूटनीतिक बेचैनी
- भारत ने अमेरिकी ठिकानों पर हमलों की निंदा की है, पर ईरान का नाम लिए बिना — संतुलित रुख बरकरार
आगे क्या
मध्य-पूर्व का यह संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीति दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है। होर्मुज से भारत का बड़ा हिस्सा तेल आयात होता है, ऐसे में लंबा तनाव पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर असर डाल सकता है। भारत की नजर सीजफायर बहाली की कोशिशों और तेल कीमतों दोनों पर टिकी है।
Sources: NPR | Wikipedia — India in the 2026 Iran war | CNN

